हनुमत स्तुति १२ - विनय पत्रिका ३६ - तुलसीदास

हनुमत स्तुति - विनय पत्रिका
॥ श्री सीतारामाभ्यां नमः ॥
विनय पत्रिका ३६
राम गौरी
हनुमत स्तुति १२
मंगल-मूरति मारुत-नंदन। सकल-अमंगल-मूल-निकंदन ॥ १ ॥
पवनतनय संतन हितकारी। ह्रदय बिराजत अवध-बिहारी ॥ २ ॥
मातु-पिता,गुरु,गनपति,सारद। सिवा समेत संभु,सुक,नारद ॥ ३ ॥
चरन बंदि बिनवौं सब काहू। देहु रामपद-नेह-निबाहू ॥ ४ ॥
बंदौं राम-लखन-बैदेही। जे तुलसीके परम सनेही ॥ ५ ॥
भावार्थ :- पवनकुमार हनुमानजी कल्याणकी मूर्ति हैं। वे सारी बुराइयोंकी जड़ काटनेवाले हैं ॥१॥ पवनके पुत्र हैं, संतोंका हित करनेवाले हैं। अवधविहारी श्रीरामजी सदा इनके हदयमें विराजते हैं ॥२॥
इनके तथा माता-पिता, गुरु, गणेश, सरस्वती, पार्वतीसहित शिवजी, शुकदेवजी, नारद ॥३॥ इन सबके चरणोंमें प्रणाम करके मैं यह विनती करता हूँ कि श्रीरघुनाथजीके चरण-कमलोंमें मेरा प्रेम सदा एक-सा निबह रहे, यह वरदान दीजिये ॥४॥
अन्तमें मैं श्रीराम, लक्ष्मण और जानकीजीको प्रणाम करता हूँ, जो तुलसीदासके परमप्रेमी और सर्वस्व हैं ॥५॥